पति की मौत के बाद खुद संभाली अपनी खेती, कमाए 30 लाख रुपए और साबित कर दिया औरत कुछ भी कर सकती है

लेकिन समाज की इस सोच को महाराष्ट्र के नासिक के मटोरी गांव की रहने वाली संगीता पिंगल ने गलत साबित किया है. संगीता कहती है कि वह उन सभी लोगों को खारिज करना चाहती थी जो मानते हैं कि एक महिला खेती नहीं कर सकती। संगीता को अपने जीवन में एक के बाद एक संकटों का सामना करना पड़ा।

2004 में, जन्म दोषों के कारण उसने अपना दूसरा बच्चा खो दिया। फिर 2007 में उनके पति ने एक सड़क हादसे में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। संगीता उन दिनों 9 महीने की प्रेग्नेंट थी। इन घटनाओं के बाद संगीत टूट गया लेकिन उसके ससुराल वालों ने उसे हिम्मत दी और उसका मनोबल बढ़ाया।
संगीता का परिवार खेती करता था। पति की मौत के बाद उनके ससुर 13 एकड़ जमीन पर खेती करते थे, लेकिन पति की मौत के कुछ साल बाद उनके ससुर भी इस दुनिया से चले गए। इसके बाद संगीता ने अपनी जमीन की देखभाल की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। खेती ही एकमात्र साधन था जिसके द्वारा उनका परिवार जीवित रह सकता था। सभी रिश्तेदार अलग हो गए क्योंकि उनका मानना ​​था कि एक अकेली महिला खेती नहीं कर सकती। लेकिन संगीता ने सबकी सोच को गलत बताया और अकेले ही खेतों में काम करने लगी।
मुश्किलों का सामना कर आगे बढ़ते रहो

खेत को पैसे की जरूरत थी, जिसके लिए संगीता ने अपना सोना गिरवी रख कर कर्ज लिया। संगीत के इस संघर्ष में उनके साथ उनके भाई भी थे। उन्होंने खेती के बारे में सब कुछ संगीत सिखाया। संगीत की विज्ञान शिक्षा भी कृषि में काम आई। उन्होंने कृषि के क्षेत्र में आगे बढ़ना शुरू किया, लेकिन इसके साथ ही उन्हें कई समस्याओं का भी सामना करना पड़ा। कभी पानी का पंप खराब हो जाता है तो कभी फसल में कीट लग जाते हैं। लेकिन संगीता ने हार नहीं मानी और चलती रही। उसने ट्रैक्टर चलाना भी सीखा और खेतों में अपना ट्रैक्टर चलाने लगा।
खेती से लाखों रुपये कमाए और मिसाल कायम की

संगीता ने अपने खेतों में अंगूर और टमाटर उगाना शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग दिखाने लगी और उनके द्वारा लगाए गए अंगूर 800 से 1000 टन तक बढ़ने लगे। लोगों द्वारा असहाय समझी जाने वाली संगीता ने 25-30 लाख रुपये कमाकर अपनी मेहनत का परिचय दिया। अपने एक इंटरव्यू में संगीता कहती हैं कि वह अभी भी खेती के बारे में सीख रही हैं। वह वर्तमान में अपने खेत में उगाए गए अंगूरों को निर्यात करने की कोशिश कर रही है। उनकी बेटी ग्रेजुएशन कर रही है, बेटा एक निजी स्कूल में पढ़ रहा है। संगीता के मुताबिक खेती ने उन्हें धैर्य रखना सिखाया।

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